Wednesday, 1 February 2012

मतदान 2012




सूक्खू दादा बोल पड़ेः- ई मतदान का होला भीया
चुनाव जितना ही नजदीक आ रहा है सभी राजनीतिक पार्टीयों के प्रत्यासी चुनाव में अपना प्रचार व प्रसार करने में रात दिन एक करके लगते जा रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं। निर्वाचन आयोग भी कड़ी रूख किया हुआ है। ऐसे में प्रत्यासियों की लाउडस्पीकर की आवाज इस बार दब चूकी है कहीं से भी आवाज नहीं सुनाई दे रही है। केवल एक ही आवाज चारों तरफ से आ रही है वह है मतदान करो मतदान करो। स्कूलों कालेजों व समूहों के माध्यम से सभी लोगों से मतदान करने का आग्रह किया जा रहा है। दोपहर के समय पान की दूकान पर चार-पाच बुजूर्ग चाय-पान कर रहे थे। पहले चाय फिर पान उसके बाद राजनीतिक चर्चा न हो यह हो ही नहीं सकता। सूक्खू दादा का समूह पान खाया तभी रोड पर विद्यालय के बच्चे बैनर और पोस्टर लिये मतदान करों-मतदान करो का नारा लगाते नजर आये। उन लोगों के चले जाने पर सूक्खू दादा पूछ पडे़ कि एह बार वोट न देवे के होई का वोटिया क नाम त कहीं सुनईत ना हव बस मतदान करा मतदान करा लेकिन ई बतावा कि मतदान का होला भीया। बिरजू दादा थोड़े व्यंगात्मक मिजाज में बोल पड़े कि मतदान क मतलब दान मत करा। सुक्खू दादा गुस्साये और तपाक से उठकर बोले सरमदान करे, कन्या दान करे, अन्नदान करेे  सरवा दान करत करत पुरा उमर बीत गईल अ आजू काली क लड़का हमके सिखावत हऊअन की मत दान करा। करब दान हम - दुकान पर आस पास बैठे सभी लोग ठहाका लगाकर हॅसने लगे। तभी बगल से नखडू दादा बोले हसा मत आर सूक्खूआ अबहीं ‘नादान’ हव ओके का पता का ‘मतदान’ हव।

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