Sunday, 19 April 2015

वाह रे गरीब रथ उर्फ "मैजिक मूवमेंट" तुम बहुत सता रही हो....

सबसे पहले ...आज आपका यश दूसरी बार वाराणसी से दिल्ली जा रहा है साथ में है बड़े भाई गजेन्द्र सिंह "गज्जी" और वाराणसी के युवा कलमवीर मेरे करीबी मित्र अमन सिंह।

गरीब रथ में भोजन करते गजेन्द्र सिंंह।
दोनों भाइयों ने ट्रेन टिकट की जिम्मेदारी मेरे ऊपर छोड़ दी और मैं भी गरीब रथ को "मैजिक मूवमेंन्ट" समझ बैठा और वाराणसी टू दिल्ली की यात्रा "मैजिक मूमेंट ट्रेन गरीब रथ से ही करने का निश्चय किया और 3 एसी का तीन टिकट कटा लिया पहला ज़ी.के. और दूसरा ए. के. और तीसरा पी.के. नाम से तीन टिकट बड़े मजे की बात यह है कि जी.के.ए.के.पी.के. तीन लोगों को साथ में यात्रा करना है। हालाँकि यात्रा के प्रारम्भ में कुछ मित्र पूछे किस ट्रेन से जा रहे हैं तो मेरा जवाब होता "मैजिक मूवमेन्ट" ट्रेन से लोग आश्चर्य चकित हो जाते की ये कौन सी नई ट्रेन है मैं बताया की लालू जी के समय में जिस ट्रेन ने खूब जादूगरी की थी उसका ही नाम है मैजिक मूवमेंट, लोग खुश मैं भी खुश।
यात्रा प्रारम्भ हुई इस मैजिक मूवमेंट ने तो कमाल कर दिया ट्रेन में बोगी के किनारे वाली ऊपरी सीट पर मैं गया और लेट गया प्यास लगी तो ऊपर उठते ही धड़ाम से सिर लड़ गया ऊपर काफी परेशान था मैं। तब बड़े भाइयों ने कहा यह गरीब रथ है सबकुछ वही है बस 3 ए सी है। मेरा माथा चकरा गया कि वाह रे गरीब रथ तुम फिर मैजिक कर गई बड़ी कष्ट है जी दिल्ली पहुचने से पहले तुमको बहुत गरियाऊंगा ..............
आगे यात्रा जारी है 
By:-आपका प्रवीन यादव "यश"

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