Saturday, 25 April 2015

तो धरती से ज्यादा सोशल मीडिया पर था भूकंप का असर क्योंकि रेडियों व टेलीविजन बस "मन की बात" के लिए हैं।

वाराणसी। शनिवार को दोपहर में दो बार आये भूकंप से भयभीत लोग जब अपने परिचितों का हाल खबर लेने का प्रयास किये तो मोबाइल का नेटवर्क काम करना बंद कर दिया था और दो तीन बार बीप के बाद फोन डिसकनेक्ट हो जा रहा था। इस कठिन घडी में व्हाट्स एप ही एकमात्र सहारा बनकर सामने आया लेकिन हालचाल मिलने के साथ ही यह एप लोगों को खूब डराया भी। कारण केवल इतना था कि मौसम विभाग द्वारा तत्काल कोई उपडेट नहीं मिल पा रहा था और व्हाट्स एप पर अपने आप को ज्योतिषी समझने वाले फटाफट अपने ज्योतिष विद्या का प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिए कि फिर आएगा भूकंप और मचायेगा बड़ी तबाही।

कॉपी पेस्ट करने वाले गिरोह रहे सक्रिय।
जब व्हाट्स एप पर ज्योतिषी बनने वाले लोग अपनी विद्या को इस खुले मंच पर चिपका दे रहे थे तो तुरंत आदती मजबूर कॉपी पेस्ट करने वाले कई ग्रुप में धड़ाधड़ चिपकाकर " नंबर वन समाचारपत्रों की तरह मैं बड़का हूँ, नहीं मैं बड़का हूँ"( जो पिछले दिनों लखनऊ में हुआ था) वाली तर्ज पर लग जाते थे और कई ग्रुप में अपने आप को अंतर राष्ट्रीय महसूस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे हालाँकि बहुत से लोग भूकंप से बचाव सहित अन्य अच्छी जानकारियां और महत्वपूर्ण खबरें पोस्ट कर रहे थे।

एक महोदय बोले हैं कि ख़ुफ़िया तंत्र करेगा जाँच।
जिस तरह से व्हाट्स एप के माध्यम से अफवाहों को लोगों के बिच में परोसा जा रहा था उससे काफी लोग भयभीत हो गए थे पुरे दिन काम धंधा छोड़कर परिवार सहित घर से बाहर निकलकर  भूकंप आने का इंतज़ार कर रहे थे तथा शायंकाल ये समझे की मुर्गी की जगह अंडा भी उड़ाया जा रहा है तो खूब कोसे पेस्टियाने वालों को। हालाँकि शायं काल एक मित्र ने व्हाट्स एप पर शेयर किया कि अफवाह फ़ैलाने वालों की जाँच चल रही है इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन बहुत से ऐसे परिवार जिनकी आज रात की नींद गायब है।

अब रेडियो और सरकारी चैनल मन की बात तक ही सिमित हैं।

यहाँ बड़ा सवाल यह उठता है की क्या सरकार को सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से सही जानकारी नहीं डालना चाहिए था और यदि सरकार द्वारा ही दो से तीन बजे के समय तेज भूकंप आने का संदेश दिया गया था फिर क्यों नहीं आया?
और बाद में मौसम विभाग ने जो तमाम जानकारी दिया क्या वह पहले नहीं पता किया जा सकता था।
मुझे लगता है कि अब ये रेडियो और टेलीविजन के सरकारी चैनल अब केवल "मन की बात" करने तक ही सिमित हो गए हैं।जनता भले ही अफवाहों से मर जाये लेकिन हम करेंगे तो बस "मन की बात" । कल यानि 26 अप्रैल को 11 बजे से "मन की बात" होगी सुनना और देखना मत भूलियेगा।
Post a Comment