Tuesday, 26 May 2015

साहब! विज्ञापन पैसे को खा रहा, नेता देश को खा रहे, लेकिन जनता भूखे मर रही है ?

वाराणसी। अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे हो गये और इस दौरान बीजेपी सरकार या यूॅ केहें मोदी सरकार अपनी शेखी बघारने और अपने द्वारा एक वर्ष में पूरे किये गये कार्यों को जनता के सामने बताने के लिये खूब धन खर्च किया। यदि यही करोड़ों रूपया किसी जनपद के पीछे खर्च कर दिया गया होता तो वह दुनियॉ का सबसे सुन्दर जनपद बन ​गया होता मैं यह नहीं कहता कि सरकार को अपनी बातें लोगों के सामने नहीं बतानी चाहिए लेकिन क्या यह जरूरी है अभी तक तो काम बोलता है कि बातें करने वाले नमों के कामों की बोली बंद कैसे हो गयी।
केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेस के दौरान बताया कि यह एक समस्या है। लेकिन इसका हल ढूंढा गया है और अब इसमें काफी कमी आयी है। विवादास्पद बयान देने वाले नेताओं को उनकी जिम्मेदारी समझायी गयी है। लेकिन अनाप सनाप बाते मंच से बोल देने वाले इनके नेताओं और मंत्रियों की जुबान पर क्या सचमुच लगाम लग जायेगी यह तो भविष्य के गर्भ में है।
नमों सरकार ने सफाई अभियान चलाया देश को साफ सुथरा बनाने के लिये संकल्प दिलवाया गया बनारस की एकाध गलियों से लेकर घाटों तक की सफाई करते हुए मोदी ​मीडिया के विश्व पटल पर कई दिनों तक छाये रहे लेकिन आज एक वर्ष गुजर जाने के बाद उस स्थान को देखा जाय तो क्या वहॉ या उन गलियों में गन्दगी नहीं है जहॉ मोदी ने सफाई किया था जरूर है।
झूठ की बहाने बाजी अखबारों और चैनलों में पैसे के बल पर छाये रहना कोई मतलब नहीं रखता इन भोली भाली जनता पर।

इनके 8.67 करोड़ भक्त इनका प्रचार नहीं कर पाते हैं क्या?
मोदी सरकार में सबसे बड़ी यह बात देखने को आयी कि जब पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ रही थी उस समय भी मीडिया को बहुत अच्छे तरीके से मैनेज किया गया और इस समय भी ​मीडिया को काफी अच्छे तरीके से मैनेज किया जा रहा है लेकिन आज भी कुछ ऐसे समाचार पत्र और चैनल वाले हैं जो सीना ठोककर यह बता रहे हैं कि मोदी ने कुछ नहीं किया सिवाय बयानबाजी के।

इनके सांसद इस समय टीवी और अखबार पर ही दिखाई देते हैं क्षेत्र के लोग अपने आप को छला महसूस कर रहे हैं साथ ही यह भी कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो हम नोटा ही दबा कर आये होते जब एक आदमी से पूछा गया कि सांसद जी कुछ कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मेंढक तो बरसात होने के बाद भी दिखाई देते हैं और उसी समय टर्र टर्र टर्र टर्र भी करते हैं। देश में 8.67 करोड सदस्यों को अपने से जोडने के बाद यह दुनियॉ की सबसे बडी पार्टी का तमगा हासिल कर लिया यहॉ सवाल यह भी लाजमी है कि क्या उनके सदस्य उनका प्रचार नहीं करते हैं उनके काम के बारे में जनता को नहीं बताते हैं आखिर क्यों इतना रूपया सरकार को खर्च करना पड रहा है अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिये

ये जो पैसे खर्च करे नमों ने यह बताया है कि हमने साल भर में क्या क्या किया क्या वह उनकी पैतृक सम्पत्ति थी, अभी देश भर में दौड़ लगा रहे हैं क्या वह अपने पैसे से दौड़ रहे हैं?

नहीं यह धन सवा सौ करोड़ देशवासियों का है और देश के जनता की गाढ़ी कमाई है मुझे पता है यह मीडिया जब भौंकती है तो आप उसपर प्रसाद स्वरूप विज्ञापन परोस देते हैं और सच्चाई जनता के सामने आने से छूपी रहती है लेकिन सोशल मिडिया भी एक ताकत है इसे मत भूलिये यहॉ किसी कि नहीं चलती यहॉ सूट तक की बात छोडिये पैंट के अन्दर का भी आंकड़ा प्रकाशित किया जाता है। 

लेखक 
प्रवीन यादव "यश "
कापीराईट के अधीन
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