Thursday, 7 May 2015

ई-गवर्नेंस वाले गांव में ई-अनपढ़ मुखिया, तो..सरकार यहाँ है बदलाव की जरुरत है।

फोटों AU देहरादून से साभार
वाराणसी।देश के विकास में गांवों का बहुत बड़ा योगदान और समर्थन रहता है गांवों से देश की राजनीती तय होती है और यही लगभग 60 प्रतिशत आबादी  देश के मुखिया को तय करती है और गांव -गांव में अपना मुखिया भी चुनती है।
लेकिन सत्ता या ऊँचे ओहदे पर पहुचने के बाद इनके द्वारा चुने गए लोग ही इनको नकारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।सुविधाओं के लिए आने वाले पैसे को जनता से ज्यादा अपना पैसा समझकर हजम कर जाते हैं प्रधानजी। हालाँकि माँ बाप का हर बेटा नालायक नहीं होता लेकिन इस समय नालायकों की संख्या भी कम नहीं है।
आने वाले कुछ महीनो में उत्तर प्रदेश के गांवों में ग्राम प्रधान का चुनाव होने वाला है जनता द्वारा गांव का मुखिया चुने गए लोग पिछले चार वर्ष तक अपना पेट भरने में ही काफी समय बर्बाद कर दिए और अब जब सर पर चुनाव का नशा सवार हुआ तो ग्रामीणों का पेट भरने निकल रहे हैं अपना वोट बैंक सेट करने में लग गए है कल बल और छल का पूरा प्रयोग कर रहे हैं। ये मुखिया अपना वोट बनाने के लिए ग्रामीणों के उपयोग हेतु रास्ते बनवाने से लेकर नास्ते तक का इंतजाम खुद कर रहे हैं। इसी में फंस जाते हैं ये भोले भाले लोग और पांच साल तक दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं। कुछ गांवों में महिला का सीट आरक्षित है वहाँ से महिला प्रधान हैं लेकिन महिला बस नाम की मुखिया है काम तो प्रधानजी अर्थात प्रधानपति ही करते हैं।
जैसा की हम सब जानते हैं गांवों से ही देश की राजनीती तय होती है और यहीँ यदि दीमक लग रहा है तो यह पुरे देश को खोखला बना देगा। आयोग को इसपर विचार करना होगा और कुछ संसोधन भी करने होंगे क्योंकि समय रहते यदि बदलाव नहीं किया गया तो इस डिजिटल और ई गवर्नेंस के जवाने में जनता अपने आप को ठगा महसूस करेगी।
देश के प्रधानमंत्री देश के गावों को डिजिटल रूप देने के लिए तमाम योजनाएं चला रहे है और प्रदेश सरकार भी काफी सराहनीय कार्य कर रही है लेकिन क्या फायदा जब गांव का मुखिया ही अंगूठा छाप रहेगा जिसे मोबाइल तक चलाने की जानकारी नहीं रहेगी और जिसके लेटर पैड पर उसके नाम का हस्ताक्षर कोई और बनाएगा।

बदलाव को जनता स्वीकार रही है लेकिन यहाँ यक्ष प्रश्न यह है कि क्या प्रधान को उपरोक्त जानकारियां नहीं होनी चाहिये? 
यदि पढ़े लिखे और शिक्षित प्रधान रहेंगे तो ये गांव को तरक्की के लिए मजबूत रास्ता तैयार करेंगे और प्रधान से लगायात प्रधानमंत्री तक को चुनने में इन गांवों के लोगों का मताधिकार भी गलत नहीं जायेगा। 
ई गवर्नेंस की अच्छी शुरुआत यह साबित कर रही है की आने वाले समय में बची कूची सुविधाए भी ऑनलाइन हो जाएंगी और ग्रामीणों को इस प्रणाली से काफी लाभ मिल रहा है तो क्यों न गांव का प्रधान भी डिजिटल हो और देश के विकास में अपनी भागीदारी दर्ज कराये। यदि बदलाव किये बगैर चुनाव करा दिया  जायेगा तो फिर कोई विकास नहीं हो सकता और ना ही जनता इस डिजिटल युग को समझ पायेगी। खेती से लेकर खाता तक सभी सुविधाओं की जानकारी ऑनलाइन है तो फिर कलम न चला पाने वाला मुखिया कीबोर्ड कैसे चलाएगा कैसे सही और गलत की जानकारी ग्रामीणों को मिलेंगी।
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