Tuesday, 23 August 2016

लगातार बने रहते हैं वाट्सएप पर तो हो जाएं सावधान

÷तो वाट्सएप और फेसबुक लोगों को बना रहा मनोरोगी

वाराणसी। आप एंड्राइड मोबाइल चलाते हैं और वाट्सएप और फेसबुक सहित अन्य मैसेजिंग ऐप के शौक़ीन हैं और हमेशा मोबाइल का लाक खोलकर आप मैसेजिंग एप में ही परेसान रहते हैं तो हो जाइये सावधान आप पागलपन के शिकार हो जायेंगे पढ़िए ये खबर

क्या आपकी आदत है प्रतिदिन एक निश्चित समय पर वाट्सएप के जरिए अपने परिचितों व दोस्तों को गुड मॉर्निग व गुड नाइट मैसेज भेजने की। इसके साथ ही अगर दूसरी ओर से रिप्लाई न आए तो बैचैनी, घबराहट इतनी बढ़ जाती है कि मोबाइल तक तोड़ देते हैं। मैसेज टाइप करते वक्त लोगों के मना करने पर परेशान हो उठते हैं। अगर ऐसा है तो संभल जाएं, क्योंकि यह आदत आपको मनोरोगी बना सकती है। इन दिनों युवाओं में वाट्सएप मैसेजिंग को लेकर एडिक्शन तेजी से बढ़ रहा है।1 कई बार तो युवा इस बात से असुरक्षित महसूस करते हैं कि कहीं मैसेज न भेजने पर सामने वाला बुरा न मान जाए। वहीं दूसरा वर्ग यह भी है जिसके पास रिप्लाई आए न आए व मैसेज ओपन होने के करेक्ट निशान को देखकर ही संतुष्ट हो जाते हैं कि सामने वाले ने देखकर उनकी भावना समझ ली होगी। 15 से 30 वर्ष के युवा इस एडिक्शन के शिकार हो रहे हैं। इंटरनेट एडिक्शन डिस्आर्डर के तहत इस समस्या को ‘एसोसिएट डिसटरवेंस मैसेज एडिक्शन’ कहेंगे। स्थिति यह होती है कि व्यक्ति को मैसेज करने पर रोका जाए तो वह अपना आपा खो सकता है।

लक्षण : एक निश्चित समय पर मैसेज करना। अगर उस समय में थोड़ा भी व्यवधान पड़ा तो व्यक्ति को घबराहट, बेचैनी, चिड़चड़िापन, रोना, चीखना, एकाग्रता में कमी आ सकती है। वह तोड़फोड़ कर सकता है। आजकल हर बच्चे के हाथ में एंड्रायड मोबाइल हैं, जबकि माता-पिता को उन्हें स्कूल में मोबाइल ले जाने नहीं देना चाहिए। कालेज में भी कक्षा के भीतर मोबाइल ले जाने की इजाजत न दी जाए। एक कॉमन रूम की व्यवस्था हो, जहां मोबाइल जमा करवाया जाए। अक्सर देखा गया है कि क्लास रूम में टीचर पढ़ा रहे होते हैं और बच्चे टेक्स्ट मैसेजिंग, वाट्सएप मैसेज से एक-दूसरे से बातचीत करते रहते हैं। इससे उनकी एकाग्रता भंग हो जाती है। प्रेमी प्रमिकाओं के बीच होने वाले मैसेजिंग को रोकने पर उनमें अक्रामता ज्यादा देखी जाती है।

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