Thursday, 18 August 2016

वाराणसी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दलितों का हो रहा शोषण

÷बड़ा सवाल कौन उठाए आवाज?

÷पैसा न मिलने से रक्षाबंधन भी रहा फीका

Team VIP

वाराणसी । हवाईअड्डे पर सफाई का कार्य करने वाले दलितों के घर चूल्हा जला या नहीं, राखी का पर्व मनाया गया या नहीं, उनके बच्चों को दो रोटी मिली या नहीं इन सवालों से परे हवाईअड्डे के साहब के घर में जश्न मनाया जा रहा है उनके बच्चे फेसबुक और वाट्सएप ट्विटर पर भाई बहन के साथ ही तस्वीर हँसते हुए इमोजी के साथ शेयर कर रहे हैं और उनको लाइक भी मिल रही है कमेंट भी और हवाईअड्डे पर कार्यरत साहब को भी खूब आनंद है महँगी दुकानों की अच्छी अच्छी मिठाइयां भी खाये लेकिन हवाईअड्डे पर कार्यरत सफाईकर्मियों की तनिक भी फिकर अथॉरिटी के अधिकारियों को नहीं रही।

दलितों के शोषण का मामला गुजरात से लेकर दिल्ली तक गूंज रहा है और दलित अपना अधिकार पाने के लिए नारेबाजी और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं साथ ही समाचार चैनलों में भी यह दिखाया जा रहा है कि सम्मलेन में अपनी आवाज बुलंद कर लौट रहे दलितों की पिटाई किस तरीके से दबंगो द्वारा की गयी। दलितों का एक बड़ा समूह आंदोलन का रूप पकड़ रहा है। गुजरात मॉडल में जहाँ विकास के दावे किये गए वहीं दलितों के साथ उत्पीड़न किया जाना गुजरात सरकार के लिए एक काला धब्बा शाबित हुआ अब दलित उत्पीड़न पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी पहुच चूका है यहाँ लाल बहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सफाईकर्मियों का शोषण अथॉरिटी द्वारा जमकर किया जा रहा है आलम यह है कि इनका वेतन तक समय पर नहीं दिया जा रहा है चार माह से वेतन रुका हुआ है घर में खाने के लिए रोटी नहीं है बच्चे तड़प रहे हैं लेकिन अथॉरिटी है कि सुनता ही नहीं है। अपने वेतन को लिए इनको धरना प्रदर्शन तक करना पड़ रहा है जबकि अथॉरिटी का एक अधिकारी धरना दे रहे सफाईकर्मियों के कार्ड भी जमा करा लिया और यहाँ तक कह दिया कि जाओ जो करना है कर लो रुका हुआ पैसा अगले माह में कई किश्तों में करके दिया जायेगा और यदि धरना करते हो तो नौकरी से भी निकाल दिया जायेगा। धरने पर बैठे गुस्साए सफाईकर्मियों ने जब अपनी बात मीडिया तक पहुँचायी तो अथॉरिटी के हाथ पांव सूज गए और तत्काल कार्ड देते हुए सफाई का काम करने के लिए बोला गया लेकिन वेतन कब मिलेगा यह नहीं पता।

पैसा न मिलने के चलते रक्षाबंधन के पर्व पर भी सफाईकर्मियों का घर आज सुना रहा लोग दूसरे के घरों की तरफ निहारते रहे एक सफाईकर्मी ने तो यहाँ तक बताया कि पिछले वर्ष एक गरीब विधवा महिला को नौकरी से निकालने के लिए अथॉरिटी द्वारा तमाम हथकंडे अपनाये गए और अन्त बेचारी के चरित्र पर ही उंगली उठाते हुए उसे निकाल दिए। मालूम हो कि हवाईअड्डे पर सफाई का कार्य करने के लिए दो कार्यदायी संस्थाएं कार्यरत हैं और इनमें पहले तो दो दर्जन से अधिक दलित महिला और पुरुष सफाई का कार्य करने के लिए रखे गए थे अब अन्य जातियों के लोग भी शामिल हो चुके हैं।

अब सवाल यह है कि यदि सफाई का कार्य हवाईअड्डे पर किया जा रहा है तो उनका ही पैसा क्यों रोका जा रहा है?अपने मेहनत के पैसे के लिए उनको धरना प्रदर्शन क्यों करना पड़ रहा है? बताते चलें कि यह नाटक हर वर्ष होता है और इनके वेतन को रोककर अथॉरिटी न जाने कितना खुश रहती है।

Post a Comment